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फेकू का 22 वा

फेकू का 22 वा

 माननीय मोदीजी के जीवन में उनकी 20-22 साल की उम्र विशिष्ट है। यही वह अवस्था है जिसमें उन्होंने लगभग वह सारे काम किए जो भगवान राम को करने में अयोध्या काण्ड से लंका काण्ड तक का समय लगा। मतलब भगवान राम के 14 वर्षों के काम को इन्होने मात्र दो-तीन वर्षों में कर लिया।

 
उम्र के इस अवस्था में ये घर को त्याग चुके थे। मोदी जी ने इसी बीच हिमालय में तपस्या की। संघ के पूर्णकालिक सदस्य बने, प्रचारक हुए। इस बीच बेलूर मठ के प्रवास को पूरा कर अहमदाबाद गए जहाँ अपने चाचा के कैंटीन (गुजरात राज्य पथ परिवहन निगम) मे नौकरी की। 
 
और तो और इसी कालखंड में वे भीख मांग कर जीवन यापन कर रहे थे। (उन्होने बताया है कि उन्होने 35 वर्षों तक भिक्षा मांग कर खाया है। जाहिर है ये 35 वर्ष गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले अर्थात 2001 से पहले के हैं)
 
फिर बंग्लादेश की आजादी की लड़ाई लड़ी और जीतने के बाद शेख मुजीबुर्रहमान को वहाँ का राज-पाट ठीक वैसे ही सौंप दिया जैसे भगवान राम ने लंका विभिषण को सौंप दिया था।
 
ये वो बातें हैं जो बमार्फत खुद मोदीजी लोगों को मालूम है। परन्तु कृत्यों की यह सूची अभी भी पूर्ण नहीं है।
 
आने वाले समय में उनके और कारनामे सामने अवश्य आएंगे। कोई और नहीं ये जानकारी खुद मोदीजी ही देंगे। ये भी उनकी एक महानता ही है कि उनके कृत्यों को जनमानस तक पहुँचाने के लिए किसी वाल्मिकी, तुलसीदास या सूरदास जैसे विभूतियों की कोई आवश्यकता नहीं। अपनी आत्मकथा से किश्तवार अवगत कराकर वो मानवजाति को निरंतर अनुगृहित करते हैं। और मीडिया के धुरंधर इसका चित्रण, प्रकाशन और प्रसार करते हैं।
 
इसलिए कहता हूँ कि मोदी जी नाॅर्मल आदमी नहीं हैं।
राजेश दुबे